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अमरूद की खेती: कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला फलदार व्यवसाय

अमरूद की खेती: कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला फलदार व्यवसाय

भारत में फलदार फसलों में अमरूद का एक खास स्थान है। इसे “गरीबों का सेब” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें भरपूर पोषण होता है और इसकी खेती अपेक्षाकृत कम लागत में की जा सकती है। सही देखभाल और आधुनिक तकनीक अपनाकर अमरूद की खेती किसानों के लिए स्थायी आमदनी का मजबूत जरिया बन सकती है।

 

अमरूद की खेती के लिए अनुकूल जलवायु और मिट्टी

अमरूद एक ऐसा फल है जो अलग-अलग जलवायु में आसानी से उगाया जा सकता है।

तापमान: 15°C से 30°C सबसे उपयुक्त

जलवायु: हल्की सर्दी और मध्यम गर्मी

मिट्टी: दोमट, बलुई दोमट या हल्की काली मिट्टी

मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच हो तो पौधों की बढ़वार और फल की गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं।

 

उन्नत किस्मों का चयन क्यों जरूरी है

अमरूद की खेती में सही किस्म का चुनाव उत्पादन और बाजार भाव दोनों को प्रभावित करता है।
भारत में प्रचलित कुछ उन्नत किस्में हैं:

इलाहाबादी सफेदा

लखनऊ-49

थाई अमरूद

लाल गूदा अमरूद

स्थानीय मौसम और बाजार मांग को ध्यान में रखकर किस्म चुनना ज्यादा फायदेमंद होता है।

 

पौध रोपण और खेत की तैयारी

अमरूद का बाग लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना जरूरी है।

खेत को समतल करें

1×1×1 मीटर के गड्ढे तैयार करें

गड्ढों में गोबर की सड़ी खाद और मिट्टी मिलाएँ

पौध रोपण का सबसे अच्छा समय जुलाई से सितंबर या फरवरी से मार्च माना जाता है।

 

सिंचाई और खाद प्रबंधन

अमरूद के पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन शुरुआती वर्षों में नियमित सिंचाई जरूरी होती है।

गर्मियों में: 7–10 दिन में

सर्दियों में: 15–20 दिन में

खाद के रूप में:

गोबर की खाद

नाइट्रोजन

फॉस्फोरस

पोटाश

का संतुलित उपयोग पौधों की सेहत और फल उत्पादन को बढ़ाता है।

 

कटाई-छंटाई का महत्व

अमरूद में सही समय पर कटाई-छंटाई (Pruning) करने से पौधे हवादार रहते हैं और फल आकार में बड़े व गुणवत्तापूर्ण होते हैं।
पुरानी, सूखी और रोगग्रस्त टहनियों को हटाना बहुत जरूरी होता है।

 

रोग और कीट प्रबंधन

अमरूद की खेती में मुख्य रूप से ये समस्याएँ देखी जाती हैं:

फल मक्खी

उकठा रोग

पत्ती धब्बा रोग

इनसे बचाव के लिए:

साफ-सुथरा बाग

समय पर जैविक या आवश्यक दवाओं का उपयोग

रोग-मुक्त पौध लगाना

बहुत जरूरी होता है।

https://www.youtube.com/watch?v=itZzsD46nOU

 

आधुनिक तकनीक और उपकरणों की भूमिका

आज के समय में फल बागवानी में भी आधुनिक तकनीक का महत्व बढ़ गया है। ड्रिप सिंचाई, स्प्रे मशीन और बाग प्रबंधन से जुड़े उपकरण किसानों का समय और मेहनत दोनों बचाते हैं। सही जानकारी और भरोसेमंद स्रोत से तकनीकी समाधान लेना लंबे समय में काफी लाभदायक साबित होता है।

 

निष्कर्ष

अमरूद की खेती उन किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो कम जोखिम में स्थायी आमदनी चाहते हैं। सही किस्म, संतुलित खाद-पानी, समय पर देखभाल और आधुनिक तरीकों को अपनाकर अमरूद बाग से कई वर्षों तक अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। थोड़ी समझदारी और निरंतर मेहनत इस खेती को सफल बना सकती है।

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